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mahabharat 7.32.35-36h: तब सेनापति धृष्टद्युम्न ने यह उपयुक्त अवसर कहकर, सदैव शीघ्रता करने वाले पाण्डवों से और भी शीघ्रता करने का आग्रह किया ॥35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.32.35-36h 
तत: सेनापति: शीघ्रमयं काल इति ब्रुवन्॥ ३५॥
नित्याभित्वरितानेव त्वरयामास पाण्डवान्।
 
 
अनुवाद
तब सेनापति धृष्टद्युम्न ने यह उपयुक्त अवसर कहकर, सदैव शीघ्रता करने वाले पाण्डवों से और भी शीघ्रता करने का आग्रह किया ॥35 1/2॥
 
Then the commander Dhrishtadyumna, saying that this was the opportune moment, urged the Pandavas, who were always in a hurry, to hurry even more. ॥ 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)