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mahabharat 7.32.31-32h: कोई अपने ही सैनिकों को मार रहा था तो कोई अपने तीखे बाणों से शत्रु योद्धाओं को मार रहा था। उस युद्ध में एक पर्वत शिखर के समान विशाल हाथी धनुष-बाण से मारा गया और वर्षा ऋतु में नदी के तट के समान भूमि पर गिरकर चूर-चूर हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.32.31-32h 
स्वानन्योऽथ परानन्यो जघान निशितै: शरै:।
गिरिशृङ्गोपमश्चात्र नाराचेन निपातित:॥ ३१॥
मातङ्गो न्यपतद् भूमौ नदीरोध इवोष्णगे।
 
 
अनुवाद
कोई अपने ही सैनिकों को मार रहा था तो कोई अपने तीखे बाणों से शत्रु योद्धाओं को मार रहा था। उस युद्ध में एक पर्वत शिखर के समान विशाल हाथी धनुष-बाण से मारा गया और वर्षा ऋतु में नदी के तट के समान भूमि पर गिरकर चूर-चूर हो गया।
 
Some were killing their own soldiers and some were killing the enemy warriors with their sharp arrows. In that war, a huge elephant like a mountain peak was killed by a bow and arrow and fell on the ground like the bank of a river during the rainy season and got crushed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)