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mahabharat 7.32.26-27h: एक वीर पुरुष ने अपने ही चक्र से शत्रु योद्धा के चक्र को नष्ट कर दिया, तथा युद्ध में बाण चलाने का अवसर न मिलने पर अपनी गदा से उसका सिर काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.32.26-27h 
चक्रेण चक्रमासाद्य वीरो वीरस्य संयुगे॥ २६॥
अतीतेषुपथे काले जहार गदया शिर:।
 
 
अनुवाद
एक वीर पुरुष ने अपने ही चक्र से शत्रु योद्धा के चक्र को नष्ट कर दिया, तथा युद्ध में बाण चलाने का अवसर न मिलने पर अपनी गदा से उसका सिर काट डाला।
 
A brave man, having dispelled the discus of the enemy warrior with his own discus, cut off his head with his mace as there was no opportunity in the battle to shoot an arrow. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)