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mahabharat 7.32.20-21h: कई रथ टूट गए, झंडे कट गए, छत्रियाँ ज़मीन पर गिर गईं और जुए टूट गए। घोड़े टूटे हुए जुओं का आधा हिस्सा ही उठाकर तेज़ी से दौड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.32.20-21h 
रथो भग्नो ध्वजश्छिन्नश्छत्रमुर्व्यां निपातितम्॥ २०॥
युगार्धं छिन्नमादाय प्रदुद्राव तथा हय:।
 
 
अनुवाद
कई रथ टूट गए, झंडे कट गए, छत्रियाँ ज़मीन पर गिर गईं और जुए टूट गए। घोड़े टूटे हुए जुओं का आधा हिस्सा ही उठाकर तेज़ी से दौड़ रहे थे।
 
Many chariots were broken, flags were cut, umbrellas were thrown on the ground and yokes were broken. The horses were running fast carrying only half of the broken yokes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)