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mahabharat 7.32.2: तब द्रोणाचार्य ने भीमसेन के प्राणों पर शीघ्रतापूर्वक सीधे और तीखे बाणों से प्रहार किया। वे भीमसेन का अंत करना चाहते थे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.32.2 
तस्य द्रोण: शितैर्बाणैस्तीक्ष्णधारैरजिह्मगै:।
जीवितान्तमभिप्रेप्सुर्मर्माण्याशु जघान ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य ने भीमसेन के प्राणों पर शीघ्रतापूर्वक सीधे और तीखे बाणों से प्रहार किया। वे भीमसेन का अंत करना चाहते थे॥ 2॥
 
Then Dronacharya quickly attacked Bhimasena's vital spots with straight and sharp arrows. He wanted to end Bhimasena's life.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)