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mahabharat 7.32.17-18h: काले लोहे के कवच पहने हुए विशाल हाथियों ने युद्धभूमि में गिरे हुए बहुत से मनुष्यों, रथों, घोड़ों और हाथियों को मोटे सरकण्डों की तरह रौंद डाला। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.32.17-18h 
कार्ष्णायसतनुत्राणान् नराश्वरथकुञ्जरान्॥ १७॥
पतितान् पोथयाञ्चक्रुर्द्विपा: स्थूलनलानिव।
 
 
अनुवाद
काले लोहे के कवच पहने हुए विशाल हाथियों ने युद्धभूमि में गिरे हुए बहुत से मनुष्यों, रथों, घोड़ों और हाथियों को मोटे सरकण्डों की तरह रौंद डाला। 17 1/2
 
Wearing black iron armour, the huge elephants trampled many men, chariots, horses and elephants that had fallen on the battlefield like thick reeds. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)