श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.32.16-17h 
नरान्त्रै: केचिदपरे विषाणालग्नसंश्रयै:॥ १६॥
बभ्रमु: समरे नागा मृद्नन्त: शतशो नरान्।
 
 
अनुवाद
अनेक हाथी अपने दांतों में मानव आंतें फंसाए युद्धभूमि में घूम रहे थे और सैकड़ों योद्धाओं को कुचल रहे थे।
 
Many elephants were roaming around the battlefield with human intestines stuck in their teeth, crushing hundreds of warriors. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)