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श्लोक  7.31.28 
अचिन्तयंश्च ते सर्वे पाण्डवानां महारथा:।
कथं नो वासविस्त्रायाच्छत्रुभ्य इति मारिष॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आर्य! उस समय समस्त पाण्डव योद्धा यह विचार करने लगे कि इन्द्रकुमार अर्जुन शत्रुओं के हाथ से हमारी रक्षा किस प्रकार कर सकते हैं?॥ 28॥
 
Arya! At that time all the Pandava warriors began to think that how can Indrakumar Arjun protect us from the hands of the enemies?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)