श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.30.8 
तावेकरथमारूढौ भ्रातरौ वृषकाचलौ।
शरवर्षेण बीभत्सुमविध्येतां मुहुर्मुहु:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रथ पर बैठे हुए वृषक और अचल दोनों भाई बार-बार बाणों की वर्षा से अर्जुन को घायल करने लगे।
 
Thus seated on a chariot the two brothers, Vrishak and Achal, began wounding Arjuna with a repeated shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)