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mahabharat 7.30.5: तत्पश्चात् अर्जुन ने पुनः अपने बाणों तथा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों द्वारा सुबलपुत्र आदि समस्त गणधरों को व्यथित कर दिया॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.30.5 
ततोऽर्जुन: शरव्रातैर्नानाप्रहरणैरपि।
गान्धारानाकुलांश्चक्रे सौबलप्रमुखान् पुन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन ने पुनः अपने बाणों तथा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों द्वारा सुबलपुत्र आदि समस्त गणधरों को व्यथित कर दिया॥5॥
 
After that, Arjun again troubled all the Gandharas like Subalaputra with his arrows and various types of weapons. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)