श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.30.4 
वृषकस्य हयान् सूतं धनुश्छत्रं रथं ध्वजम्।
तिलशो व्यधमत् पार्थ: सौबलस्य शितै: शरै:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से सुबलपुत्र वृषक के घोड़े, सारथि, रथ, धनुष, छत्र और ध्वजा को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Then Arjuna, the son of Kunti, with his sharp arrows cut into pieces the horses, charioteer, chariot, bow, umbrella and flag of Vrishaka, the son of Subala. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)