श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.30.36 
तं वासवमिवायान्तं भूरिवर्षं शरौघिणम्।
महेष्वासा नरव्याघ्रा नोग्रं केचिदवारयन्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जो इन्द्र के समान बाणरूपी जलराशि धारण किए हुए हैं और अपार वर्षा करने वाले हैं, उन महाबली योद्धा अर्जुन को आते देख कोई भी महाधनुर्धर, सिंह या कौरव योद्धा उन्हें रोक नहीं सका॥36॥
 
Seeing the fierce warrior Arjuna coming, who has the arrow-like water sign like Indra and brings immense rain, no great archer, male lion or Kaurava warrior could stop him. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)