श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.30.32-33h 
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोषं वादित्राणां च नि:स्वनम्॥ ३२॥
गाण्डीवस्य तु निर्घोषो व्यतिक्रम्यास्पृशद् दिवम्।
 
 
अनुवाद
शंख और दुन्दुभियों की ध्वनि, बाजे की ध्वनि और गाण्डीव धनुष की गम्भीर ध्वनि आकाश को पार करके स्वर्ग तक पहुँच गई ॥32 1/2॥
 
The sound of conch shells and dundubhis, the sounds of musical instruments and the solemn sound of Gandiva's bow crossed the sky and reached heaven. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)