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mahabharat 7.30.31-32h: महाराज! उस समय धूल से सनी सेना में हम अर्जुन को देख नहीं पा रहे थे। मुझे तो केवल दक्षिण दिशा में उनके धनुष की टंकार ही सुनाई दे रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.30.31-32h 
नापश्याम ततस्त्वेनं सैन्ये वै रजसावृते॥ ३१॥
गाण्डीवस्य च निर्घोष: श्रुतो दक्षिणतो मया।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय धूल से सनी सेना में हम अर्जुन को देख नहीं पा रहे थे। मुझे तो केवल दक्षिण दिशा में उनके धनुष की टंकार ही सुनाई दे रही थी।
 
Maharaj! At that time we were unable to see Arjuna in the dusty army. I could only hear the twang of his bow towards the south. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)