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mahabharat 7.30.27-28h: तदनन्तर, जब मोह नष्ट हो गया, तब अर्जुन के बाणों से घायल और भयभीत होकर शकुनि वेगवान घोड़ों पर सवार नीच पुरुषों की भाँति भाग गया॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.30.27-28h 
तदा हतासु मायासु त्रस्तोऽर्जुनशराहत:॥ २७॥
अपायाज्जवनैरश्वै: शकुनि: प्राकृतो यथा।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, जब मोह नष्ट हो गया, तब अर्जुन के बाणों से घायल और भयभीत होकर शकुनि वेगवान घोड़ों पर सवार नीच पुरुषों की भाँति भाग गया॥27 1/2॥
 
Then, after the illusions were destroyed, Shakuni, wounded and frightened by Arjuna's arrows, fled away like lowly men on fast horses.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)