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mahabharat 7.30.26-27h: इस प्रकार सुबलपुत्र शकुनि द्वारा बार-बार प्रयोग किये गये नाना प्रकार के मोहों को अर्जुन ने हँसते हुए अपने अस्त्रों के बल से शीघ्र ही नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.30.26-27h 
एवं बहुविधा माया: सौबलस्य कृता: कृता:॥ २६॥
जघानास्त्रबलेनाशु प्रहसन्नर्जुनस्तदा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सुबलपुत्र शकुनि द्वारा बार-बार प्रयोग किये गये नाना प्रकार के मोहों को अर्जुन ने हँसते हुए अपने अस्त्रों के बल से शीघ्र ही नष्ट कर दिया।
 
In this manner, the various illusions used repeatedly by Shakuni, the son of Subala, were quickly destroyed by Arjuna smilingly with the power of his weapons. 26 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)