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mahabharat 7.30.25-26h: जब अंधकार छँटा, तो पानी की विशाल, प्रचंड धाराएँ प्रकट होने लगीं। तब अर्जुन ने आदित्यास्त्र का प्रयोग करके पानी को हटा दिया। उस अस्त्र ने वहाँ का सारा पानी सोख लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.30.25-26h 
हते तस्मिञ्जलौघास्तु प्रादुरासन् भयानका:।
अम्भसस्तस्य नाशार्थमादित्यास्त्रमथार्जुन:॥ २५॥
प्रायुङ्‍‍क्ताम्भस्ततस्तेन प्रायशोऽस्त्रेण शोषितम्।
 
 
अनुवाद
जब अंधकार छँटा, तो पानी की विशाल, प्रचंड धाराएँ प्रकट होने लगीं। तब अर्जुन ने आदित्यास्त्र का प्रयोग करके पानी को हटा दिया। उस अस्त्र ने वहाँ का सारा पानी सोख लिया।
 
When the darkness was dispelled, huge, fierce torrents of water began to appear. Then Arjuna used Adityastra to dispel the water. That weapon absorbed all the water there. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)