श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.30.15 
निहतौ भ्रातरौ दृष्ट्वा मायाशतविशारद:।
कृष्णौ सम्मोहयन् मायां विदधे शकुनिस्तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों मायाओं के प्रयोग में निपुण शकुनि ने जब देखा कि उसके दोनों भाई मारे गए हैं, तब उसने कृष्ण और अर्जुन पर माया का प्रयोग करके उन्हें मोहित कर लिया॥15॥
 
When Shakuni, who was adept in the use of hundreds of illusions, saw that both his brothers had been killed, he used illusions on Krishna and Arjuna, enchanting them.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)