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mahabharat 7.30.13: दोनों भाइयों के शरीर अपने स्वजनों को अत्यंत प्रिय थे। दसों दिशाओं में अपनी पवित्र कीर्ति फैलाकर वे रथ से उतरकर भूमि पर गिर पड़े और वहीं निश्चल पड़े रहे।   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.30.13 
तयोर्भूमिं गतौ देहौ रथाद् बन्धुजनप्रियौ।
यशो दश दिश: पुण्यं गमयित्वा व्यवस्थितौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दोनों भाइयों के शरीर अपने स्वजनों को अत्यंत प्रिय थे। दसों दिशाओं में अपनी पवित्र कीर्ति फैलाकर वे रथ से उतरकर भूमि पर गिर पड़े और वहीं निश्चल पड़े रहे।
 
The bodies of the two brothers were very dear to their relatives. Having spread their holy fame in all the ten directions, they fell from the chariot to the ground and remained motionless there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)