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mahabharat 7.30.10: जैसे ग्रीष्म ऋतु के दो महीने सूर्य की उष्ण किरणों से सम्पूर्ण जगत को झुलसा देते हैं, उसी प्रकार गांधार के राजकुमार दोनों भाई लक्ष्य भेदने में सफल होकर पाण्डवपुत्र अर्जुन पर बार-बार आक्रमण करने लगे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.30.10 
लब्धलक्ष्यौ तु गान्धारावहतां पाण्डवं पुन:।
निदाघवार्षिकौ मासौ लोकं घर्मांशुभिर्यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे ग्रीष्म ऋतु के दो महीने सूर्य की उष्ण किरणों से सम्पूर्ण जगत को झुलसा देते हैं, उसी प्रकार गांधार के राजकुमार दोनों भाई लक्ष्य भेदने में सफल होकर पाण्डवपुत्र अर्जुन पर बार-बार आक्रमण करने लगे॥10॥
 
Just as the two months of summer scorch the entire world with the hot rays of the sun, similarly, the two brothers, the princes of Gandhara, being successful in hitting the target, began to attack Pandava's son Arjuna again and again.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)