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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन
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श्लोक 1
श्लोक
7.30.1
संजय उवाच
प्रियमिन्द्रस्य सततं सखायममितौजसम्।
हत्वा प्राग्ज्योतिषं पार्थ: प्रदक्षिणमवर्तत॥ १॥
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! जो इन्द्र का प्रिय मित्र है, उस तेजस्वी प्राग्ज्योतिषपुर नरेश भगदत्त को मारकर अर्जुन दाहिनी ओर मुड़ गया॥1॥
Sanjay says- Rajan! Arjun turned to the right after killing that brilliant Pragjyotishpur King Bhagadatta who has always been Indra's dear friend. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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