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mahabharat 7.3.20-21h: वीर! तुम्हारे अतिरिक्त कोई अन्य राजा वानर शत्रुघ्न के ध्वजवाहक अर्जुन के उड़ते हुए रथ की घरघराहट को सहन नहीं कर सकेगा।   |   mahabharat अध्याय 7.3: भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 3: भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.3.20-21h 
कपिध्वजस्योत्पततो रथस्यामित्रकर्षिण:॥ २०॥
शब्दं सोढुं न शक्ष्यन्ति त्वामृते वीर पार्थिवा:।
 
 
अनुवाद
वीर! तुम्हारे अतिरिक्त कोई अन्य राजा वानर शत्रुघ्न के ध्वजवाहक अर्जुन के उड़ते हुए रथ की घरघराहट को सहन नहीं कर सकेगा।
 
Valiant! No other king except you will be able to bear the whirring sound of the flying chariot of Arjuna, the flag bearer of the monkey Shatrughan. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)