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mahabharat 7.3.17-18h: वायु और अग्नि देवता मिलकर जंगल में जिस दिशा में भी जा सकते थे, फैल जाते थे और अनेक घासों, वृक्षों और लताओं को भस्म कर देते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.3: भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 3: भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.3.17-18h 
येन येन प्रसरतो वाय्वग्नी सहितौ वने॥ १७॥
तेन तेन प्रदहतो भूरिगुल्मतृणद्रुमान्।
 
 
अनुवाद
वायु और अग्नि देवता मिलकर जंगल में जिस दिशा में भी जा सकते थे, फैल जाते थे और अनेक घासों, वृक्षों और लताओं को भस्म कर देते थे।
 
The wind and the fire god, together, spread through the forest in whatever direction they can and consume many grasses, trees and creepers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)