Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.3.11-13h: हे कौरवश्रेष्ठ! मैं कौरवकुल में आपके समान धन संग्रह करने, षड्यन्त्र रचने, युद्ध-दल बनाने और शस्त्र चलाने में समर्थ किसी अन्य को नहीं देखता, जो अपनी शुद्ध बुद्धि से समस्त कौरवों को भय से बचा सके और यहाँ बहुत से योद्धाओं का वध करके अन्त में पितरों के लोक को प्राप्त कर सके। | mahabharat अध्याय 7.3: भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कौरवश्रेष्ठ! मैं कौरवकुल में आपके समान धन संग्रह करने, षड्यन्त्र रचने, युद्ध-दल बनाने और शस्त्र चलाने में समर्थ किसी अन्य को नहीं देखता, जो अपनी शुद्ध बुद्धि से समस्त कौरवों को भय से बचा सके और यहाँ बहुत से योद्धाओं का वध करके अन्त में पितरों के लोक को प्राप्त कर सके।
O best of the Kurus! I do not see anyone else in the Kaurava clan who is like you in collecting treasury, conspiring, forming battle formations and using weapons, who with his pure intellect can save all the Kauravas from fear and after killing many warriors here, can finally attain the world of ancestors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥