श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 29: अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.29.8 
ततो नागस्य तद् वर्म व्यधमत् पाकशासनि:।
शरजालेन महता तद् व्यशीर्यत भूतले॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र के पुत्र ने बाणों की भारी वर्षा से हाथी का कवच काट डाला, जिससे कवच जर्जर होकर भूमि पर गिर पड़ा।
 
Then Indra's son cut through the elephant's armour with a heavy shower of arrows, due to which the armour became shabby and fell to the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)