राजन! इस प्रकार इन्द्र के पुत्र अर्जुन ने इन्द्र के मित्र तथा इन्द्र के समान पराक्रमी राजा भगदत्त को युद्ध में मारकर आपकी सेना के विजय की इच्छा रखने वाले अन्य शूरवीरों को भी उसी प्रकार मार डाला, जैसे प्रचण्ड वायु वृक्षों को उखाड़ फेंकती है॥51॥
Rajan! In this way, Indra's son Arjun, after killing Indra's friend and King Bhagadatta, who was as mighty as Indra, in the battle, also killed other brave men of your army who were desirous of victory, in the same way as a strong wind uproots trees. 51॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि भगदत्तवधे एकोनत्रिंशोऽध्याय:॥ २९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें भगदत्तवधविषयक उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)