श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 29: अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.29.50 
स हेममाली तपनीयभाण्डात्
पपात नागाद् गिरिसंनिकाशात्।
सुपुष्पितो मारुतवेगरुग्णो
महीधराग्रादिव कर्णिकार:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
भगदत्त स्वर्ण-माला धारण किये हुए उस स्वर्ण-आभूषणों से विभूषित पर्वत-सदृश हाथी से पृथ्वी पर गिर पड़े, मानो सुन्दर पुष्पों से सुशोभित कनेर का वृक्ष वायु के वेग से टूटकर पर्वत-शिखर से गिर पड़ा हो।
 
Bhagadatta, wearing a golden garland, fell to the ground from that mountain-like elephant adorned with golden ornaments, as if a oleander tree decorated with beautiful flowers had broken due to the force of the wind and fallen from the peak of the mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)