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श्लोक  7.29.32 
एवं वरमहं श्रुत्वा जगत्यास्तनये तदा।
अमोघमस्त्रं प्रायच्छं वैष्णवं परमं पुरा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय पृथ्वी को इस प्रकार मेरे पुत्र के लिए याचना करते हुए सुनकर मैंने उसे अपना उत्तम एवं अमोघ वैष्णव अस्त्र पहले ही दे दिया था।
 
At that time, having heard the Earth requesting for my son in this manner, I had earlier given her my most excellent and infallible Vaishnava weapon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)