श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 29: अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.29.31 
देवानां दानवानां च अवध्यस्तनयोऽस्तु मे।
उपेतो वैष्णवास्त्रेण तन्मे त्वं दातुमर्हसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र वैष्णव अस्त्र से युक्त होकर देवताओं और दानवों के लिए अजेय हो जाए, इसलिए आप कृपा करके मुझे अपना वह अस्त्र दीजिए।॥31॥
 
My son, equipped with the Vaishnava weapon, may become invincible for gods and demons, therefore, kindly give me that weapon of yours.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)