Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.29.27: मेरी एक मूर्ति इस पृथ्वी पर (बदरिका आश्रम में नर-नारायण रूप में) स्थित होकर तपस्या करती है। दूसरी मूर्ति (परमेश्वर रूप में) साक्षीभाव से संसार को शुभ-अशुभ कर्म करते हुए देखती रहती है। 27॥ | mahabharat अध्याय 7.29: अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एका मूर्तिस्तपश्चर्यां कुरुते मे भुवि स्थिता।
अपरा पश्यति जगत् कुर्वाणं साध्वसाधुनी॥ २७॥
अनुवाद
मेरी एक मूर्ति इस पृथ्वी पर (बदरिका आश्रम में नर-नारायण रूप में) स्थित होकर तपस्या करती है। दूसरी मूर्ति (परमेश्वर रूप में) साक्षीभाव से संसार को शुभ-अशुभ कर्म करते हुए देखती रहती है। 27॥
An idol of mine is situated on this earth (in the form of Nar-Narayan in Badarika Ashram) and does penance. The second idol (in the form of God) keeps watching the world as a witness doing good and bad deeds. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥