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mahabharat 7.29.26: मैं चार रूप धारण करता हूँ और सम्पूर्ण लोकों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता हूँ। मैं अनेक रूपों में विभक्त होकर सम्पूर्ण जगत का कल्याण करता हूँ॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 7.29: अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.29.26 
चतुर्मूर्तिरहं शश्वल्लोकत्राणार्थमुद्यत:।
आत्मानं प्रविभज्येह लोकानां हितमादधे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मैं चार रूप धारण करता हूँ और सम्पूर्ण लोकों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता हूँ। मैं अनेक रूपों में विभक्त होकर सम्पूर्ण जगत का कल्याण करता हूँ॥ 26॥
 
‘I assume four forms and am always ready to protect all the worlds. I divide myself into many forms and do good to the entire world.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)