श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 28: संशप्तकोंका संहार करके अर्जुनका कौरव-सेनापर आक्रमण तथा भगदत्त और उनके हाथीका पराक्रम  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.28.30 
स तु नागो द्विपरथान् हयांश्चामृद्य मारिष।
प्राहिणोन्मृत्युलोकाय तत: क्रुद्धो धनंजय:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! उस हाथी ने अनेक हाथियों, रथों और घोड़ों को कुचलकर यमलोक पहुँचा दिया। यह देखकर अर्जुन को बड़ा क्रोध आया। 30।
 
Respected Maharaja! That elephant crushed many elephants, chariots and horses and sent them to Yamaloka. Seeing this, Arjuna became very angry. 30.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि भगदत्तयुद्धे अष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें भगदत्तका युद्धविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)