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mahabharat 7.28.17: हे मनुष्यों के स्वामी! कुन्तीपुत्र अर्जुन के द्वारा मथने पर आपकी सेना उसी प्रकार टुकड़े-टुकड़े हो गई, जैसे पर्वत से टकराने पर नाव टुकड़े-टुकड़े हो जाती है।   |   mahabharat अध्याय 7.28: संशप्तकोंका संहार करके अर्जुनका कौरव-सेनापर आक्रमण तथा भगदत्त और उनके हाथीका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 28: संशप्तकोंका संहार करके अर्जुनका कौरव-सेनापर आक्रमण तथा भगदत्त और उनके हाथीका पराक्रम  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.28.17 
तथा विक्षोभ्यमाणा सा पार्थेन तव वाहिनी।
व्यशीर्यत महाराज नौरिवासाद्य पर्वतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! कुन्तीपुत्र अर्जुन के द्वारा मथने पर आपकी सेना उसी प्रकार टुकड़े-टुकड़े हो गई, जैसे पर्वत से टकराने पर नाव टुकड़े-टुकड़े हो जाती है।
 
O Lord of men! Your army, being churned by Arjun, the son of Kunti, was torn to pieces, just as a boat breaks into pieces when it hits a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)