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mahabharat 7.28.1: संजय कहते हैं - महाराज ! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने बड़ी शीघ्रता से अर्जुन के उन स्वर्णमय घोड़ों को, जो द्रोणाचार्य की सेना के पास जाने के इच्छुक थे और मन के समान वेगवान थे, द्रोणाचार्य की सेना के पास पहुँचा दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.28: संशप्तकोंका संहार करके अर्जुनका कौरव-सेनापर आक्रमण तथा भगदत्त और उनके हाथीका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 28: संशप्तकोंका संहार करके अर्जुनका कौरव-सेनापर आक्रमण तथा भगदत्त और उनके हाथीका पराक्रम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.28.1 
संजय उवाच
यियासतस्तत: कृष्ण: पार्थस्याश्वान् मनोजवान्।
सम्प्रैषीद्धेमसंछन्नान् द्रोणानीकाय सत्वरन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने बड़ी शीघ्रता से अर्जुन के उन स्वर्णमय घोड़ों को, जो द्रोणाचार्य की सेना के पास जाने के इच्छुक थे और मन के समान वेगवान थे, द्रोणाचार्य की सेना के पास पहुँचा दिया।
 
Sanjay says- Maharaj! Thereafter, Lord Krishna, with great haste, drove the golden horses of Arjuna, who were desirous of going near Drona's army, and were as swift as his mind, to reach Dronacharya's army. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)