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mahabharat 7.27.8: मैं राजा भगदत्त को, जो युद्ध में अपने हाथी के बल के कारण गर्व करता है और अपनी आयु का दंभ करता है, इन्द्र का प्रिय अतिथि बनाकर स्वर्ग भेजूँगा।’ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.27.8 
दृप्तं संख्ये द्विपबलाद् वयसा चापि विस्मितम्।
अद्यैनं प्रेषयिष्यामि बलहन्तु: प्रियातिथिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैं राजा भगदत्त को, जो युद्ध में अपने हाथी के बल के कारण गर्व करता है और अपनी आयु का दंभ करता है, इन्द्र का प्रिय अतिथि बनाकर स्वर्ग भेजूँगा।’ ॥8॥
 
I will make King Bhagadatta, who shows pride in the war due to the strength of his elephant and is arrogant about his superior age, a favourite guest of Lord Indra and send him to heaven.' ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)