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mahabharat 7.27.2: विचित्र रूपधारी भगदत्त के साथ युद्ध करते समय उड़ती हुई धूल को देखकर और हाथी की चिंघाड़ सुनकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा-॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.27.2 
रजो दृष्ट्वा समद्भूतं श्रुत्वा च गजनि:स्वनम्।
भगदत्ते विकुर्वाणे कौन्तेय: कृष्णमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
विचित्र रूपधारी भगदत्त के साथ युद्ध करते समय उड़ती हुई धूल को देखकर और हाथी की चिंघाड़ सुनकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा-॥2॥
 
Seeing the dust flying while fighting with the strange form of Bhagadatta and hearing the trumpeting sound of the elephant, Kunti's son Arjuna said to Shri Krishna -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)