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नैव कुन्तीसुत: पार्थो नैव कृष्णो जनार्दन:।
न हया न रथो राजन् दृश्यन्ते स्म शरैश्चिता:॥ १९॥
अनुवाद
महाराज! उस समय न तो कुन्तीकुमार अर्जुन, न जनार्दन श्रीकृष्ण, न घोड़े और न ही रथ दिखाई दे रहे थे। वे सभी बाणों के ढेर से ढके हुए थे।
Maharaj! At that time neither Kuntikumar Arjun, nor Janardan Shri Krishna, nor horses nor chariots were visible. All of them were covered with a pile of arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥