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mahabharat 7.27.17: पाण्डु नन्दन अर्जुन एक बार दुविधा के कारण व्याकुल हो गये, तथापि उन्होंने श्रेष्ठ मानव योद्धाओं को मारने का निश्चय करके उस दुविधा को मिथ्या बना दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनका संशप्तक-सेनाके साथ भयंकर युद्ध और उसके अधिकांश भागका वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.27.17 
स तु दोलायमानोऽभूद् द्वैधीभावेन पाण्डव:।
वधेन तु नराग्रॺाणामकरोत् तां मृषा तदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नन्दन अर्जुन एक बार दुविधा के कारण व्याकुल हो गये, तथापि उन्होंने श्रेष्ठ मानव योद्धाओं को मारने का निश्चय करके उस दुविधा को मिथ्या बना दिया।
 
Pandu Nandan Arjun once became restless due to a dilemma, however, he made that dilemma false by deciding to kill the best human warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)