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mahabharat 7.26.66: महाराज! तत्पश्चात् हाथी, रथ, घोड़े और राजागण भयभीत होकर भाग खड़े हुए और उन्होंने अत्यन्त भयंकर वाणी फैला दी। उनकी भयंकर वाणी ने पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग और युद्धभूमि की समस्त दिशाओं को चारों ओर से ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.26.66 
ततो ध्वनिर्द्विरदरथाश्वपार्थिवै-
र्भयाद् द्रवद्भिर्जनितोऽतिभैरव:।
क्षितिं वियद् द्यां विदिशो दिशस्तथा
समावृणोत् पार्थिव संयुगे तत:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् हाथी, रथ, घोड़े और राजागण भयभीत होकर भाग खड़े हुए और उन्होंने अत्यन्त भयंकर वाणी फैला दी। उनकी भयंकर वाणी ने पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग और युद्धभूमि की समस्त दिशाओं को चारों ओर से ढक दिया।
 
Maharaj! Thereafter, the elephants, chariots, horses and kings running away in fear, spread a very terrifying cry. Their terrifying voice covered the earth, sky, heaven and all directions of the battlefield from all sides. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)