Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.26.65: हे मनुष्यों के स्वामी! उस समय विशाल अंकुश से घायल होकर वह राजहासी हाथी प्राचीन काल के विशाल पंख वाले पर्वत के समान अपने शत्रुओं को अत्यन्त भयभीत करने लगा, जैसे प्रचण्ड समुद्र व्यापारियों को भयभीत कर देता है ॥ 65॥ | mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स नागराज: प्रवराङ्कुशाहत:
पुरा सपक्षोऽद्रिवरो यथा नृप।
भयं तदा रिपुषु समादधद् भृशं
वणिग्जनानां क्षुभितो यथार्णव:॥ ६५॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उस समय विशाल अंकुश से घायल होकर वह राजहासी हाथी प्राचीन काल के विशाल पंख वाले पर्वत के समान अपने शत्रुओं को अत्यन्त भयभीत करने लगा, जैसे प्रचण्ड समुद्र व्यापारियों को भयभीत कर देता है ॥ 65॥
O lord of men! At that time, after being struck by the huge goad, that king elephant, like the great winged mountain of old times, began to frighten his enemies extremely, just as a turbulent ocean frightens traders. ॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥