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mahabharat 7.26.58-59: उस समय आपका भयभीत पुत्र युयुत्सु अभिमन्यु के रथ पर बैठा था। राजा भगदत्त हाथी की पीठ पर बैठकर शत्रुओं पर बाणों की वर्षा कर रहे थे और समस्त लोकों में अपनी किरणें फैलाते हुए सूर्य के समान शोभा पा रहे थे। 58-59।   |   mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.26.58-59 
पुत्रस्तु तव सम्भ्रान्त: सौभद्रस्याप्लुतो रथम्॥ ५८॥
स कुञ्जरस्थो विसृजन्निषूनरिषु पार्थिव:।
बभौ रश्मीनिवादित्यो भुवनेषु समुत्सृजन्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
उस समय आपका भयभीत पुत्र युयुत्सु अभिमन्यु के रथ पर बैठा था। राजा भगदत्त हाथी की पीठ पर बैठकर शत्रुओं पर बाणों की वर्षा कर रहे थे और समस्त लोकों में अपनी किरणें फैलाते हुए सूर्य के समान शोभा पा रहे थे। 58-59।
 
At that time your frightened son Yuyutsu sat on Abhimanyu's chariot. King Bhagadatta sitting on the back of the elephant showered arrows on the enemies and looked like the Sun spreading its rays in all the worlds. 58-59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)