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mahabharat 7.26.52-53h: यह देखकर सुन्दर रूप से संयुक्त अंगों वाले पर्वतराज भगदत्त ने रुचिपर्वा को मुड़ी हुई गाँठ वाले बाण द्वारा यमलोक भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.26.52-53h 
तत: स रुचिपर्वाणं शरेणानतपर्वणा॥ ५२॥
सुपर्वा पर्वतपतिर्निन्ये वैवस्वतक्षयम्।
 
 
अनुवाद
यह देखकर सुन्दर रूप से संयुक्त अंगों वाले पर्वतराज भगदत्त ने रुचिपर्वा को मुड़ी हुई गाँठ वाले बाण द्वारा यमलोक भेज दिया।
 
Seeing this, the mountain king Bhagadatta, whose limbs were beautifully jointed, sent Ruchiparva to Yamaloka with an arrow having a bent knot. 52 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)