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mahabharat 7.26.30-31h: आर्य! उस समय सब लोग एक ही बात कह रहे थे - ‘अहा! इस हाथी ने भीमसेन को मार डाला, यह तो बड़ी बुरी बात है।’ राजन! उस हाथी से भयभीत होकर पाण्डवों की सारी सेना सहसा उस स्थान पर भाग गई, जहाँ भीमसेन खड़े थे।   |   mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.26.30-31h 
अहो धिङ् निहतो भीम: कुञ्जरेणेति मारिष।
तेन नागेन संत्रस्ता पाण्डवानामनीकिनी॥ ३०॥
सहसाभ्यद्रवद् राजन् यत्र तस्थौ वृकोदर:।
 
 
अनुवाद
आर्य! उस समय सब लोग एक ही बात कह रहे थे - ‘अहा! इस हाथी ने भीमसेन को मार डाला, यह तो बड़ी बुरी बात है।’ राजन! उस हाथी से भयभीत होकर पाण्डवों की सारी सेना सहसा उस स्थान पर भाग गई, जहाँ भीमसेन खड़े थे।
 
Arya! At that time everyone was saying the same thing - 'Oh! This elephant has killed Bhimasena, this is such a bad thing.' King! Frightened by that elephant, the entire army of the Pandavas suddenly ran away to the place where Bhimasena was standing. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)