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mahabharat 7.26.13: हे राजन! उनके रत्नजटित अद्वितीय ध्वज पर एक बहुमूल्य सर्प विराजमान था। पाण्डवपुत्र भीम ने शीघ्रता से दो बाणों से उसे काट डाला तथा उनके धनुष को भी टुकड़े-टुकड़े कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 26: भीमसेनका भगदत्तके हाथीके साथ युद्ध, हाथी और भगदत्तका भयानक पराक्रम  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.26.13 
तस्य नागं मणिमयं रत्नचित्रध्वजे स्थितम्।
भल्लाभ्यां कार्मुकं चैव क्षिप्रं चिच्छेद पाण्डव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उनके रत्नजटित अद्वितीय ध्वज पर एक बहुमूल्य सर्प विराजमान था। पाण्डवपुत्र भीम ने शीघ्रता से दो बाणों से उसे काट डाला तथा उनके धनुष को भी टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
O King! His unique flag made of gems had a precious serpent on it. Pandava's son Bhima quickly cut it down with two arrows and also broke his bow into pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)