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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.25.56 
रथं च स्वं समास्थाय धनुरादाय चापरम्।
स्वयं यच्छन् हयान् राजन् व्यधमत् पाण्डवीं चमूम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भूरिश्रवा ने रथ पर बैठकर स्वयं घोड़ों को नियंत्रित करते हुए दूसरा धनुष हाथ में लिया और पाण्डव सेना का संहार करना आरम्भ कर दिया।
 
King! Thereafter Bhurishrava, seated on his chariot and controlling the horses himself, took up the second bow in his hand and began killing the Pandava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)