Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.25.52: कृपाचार्य और वृष्णिवंशी वीर वर्धक्षेमि विचित्र प्रकार से युद्ध करने वाले थे । जो लोग उन दोनों को युद्ध करते देखते थे, उनके मन उसमें आसक्त हो जाते थे । उन्हें अन्य किसी कर्म का भान ही नहीं था । 52॥ | mahabharat अध्याय 7.25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युध्यन्तौ कृपवार्ष्णेयौ येऽपश्यंश्चित्रयोधिनौ।
ते युद्धासक्तमनसो नान्यां बुबुधिरे क्रियाम्॥ ५२॥
अनुवाद
कृपाचार्य और वृष्णिवंशी वीर वर्धक्षेमि विचित्र प्रकार से युद्ध करने वाले थे । जो लोग उन दोनों को युद्ध करते देखते थे, उनके मन उसमें आसक्त हो जाते थे । उन्हें अन्य किसी कर्म का भान ही नहीं था । 52॥
Kripacharya and Vrishnivanshi brave Vardhakshemi were the ones who fought in a strange manner. Those who saw both of them fighting, their minds became attached to it. He was not aware of any other action. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥