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mahabharat 7.25.44: एक दूसरे के द्वारा छोड़े गए बाणों की वर्षा से घिरे हुए और आच्छादित होकर कर्ण और पाँचों राजकुमार अपने घोड़ों, सारथि, ध्वजा और रथ सहित अदृश्य हो गए ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 7.25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.25.44 
नैव कर्णो न ते पञ्च ददृशुर्बाणसंवृता:।
साश्वसूतध्वजरथा: परस्परशराचिता:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
एक दूसरे के द्वारा छोड़े गए बाणों की वर्षा से घिरे हुए और आच्छादित होकर कर्ण और पाँचों राजकुमार अपने घोड़ों, सारथि, ध्वजा और रथ सहित अदृश्य हो गए ॥ 44॥
 
Surrounded and covered by the showers of arrows shot by each other, Karna and the five princes, along with their horses, charioteer, flag and chariot, disappeared. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)