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mahabharat 7.25.43: फिर वह अत्यन्त व्याकुल होकर कर्ण पर बाणों की वर्षा करने लगा और कर्ण भी बार-बार बाणों की वर्षा से उसे ढकने लगा ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 7.25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.25.43 
ते चैनं भृशसंतप्ता: शरवर्षैरवाकिरन्।
स च तांश्छादयामास शरजालै: पुन: पुन:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
फिर वह अत्यन्त व्याकुल होकर कर्ण पर बाणों की वर्षा करने लगा और कर्ण भी बार-बार बाणों की वर्षा से उसे ढकने लगा ॥43॥
 
Then, being greatly agitated, he began to shower arrows on Karna, and Karna too covered him again and again with a shower of his arrows. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)