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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.25.42 
कर्णस्तु केकयान् भ्रातॄन् पञ्च लोहितकध्वजान्।
द्रोणायाभिमुखं यातान् शरवर्षैरवारयत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जब कर्ण ने लाल ध्वजाओं से सुसज्जित पाँचों केकय बंधुओं को द्रोणाचार्य की ओर आते देखा, तो उसने बाणों की वर्षा करके उन्हें रोक दिया।
 
When Karna saw the five Kekaya brothers, princes, adorned with red flags, going towards Dronacharya, he stopped them with a shower of arrows. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)