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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.25.41 
स दुर्मुखं भ्रुवोर्मध्ये नाराचेनाभ्यताडयत्।
तस्य तद् विबभौ वक्त्रं सनालमिव पङ्कजम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तब पुरुजित ने दुर्मुख की भौंहों के मध्य भाग में नाराचद्वार से प्रहार किया। उस समय दुर्मुख का मुख अमृत से भरे हुए कमल के समान सुन्दर हो गया।
 
Then Purujit attacked Durmukh with a Narachdwara in the middle part of his eyebrows. At that time Durmukh's face became beautiful like a lotus filled with nectar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)